कजलीगढ़ फोर्ट __ kajligarh
कजलीगढ़ रहस्य और रोमांच से भरपूर I इस किलेनुमा परकोटे में दाखिल होते है दूर तलक फैले सन्नाटे को चीरते हुए सन-सन हवाये चलती है I सन्नाटे मे पत्तो के खड़कने तक की आवाज़ सुन सकते है I कुछ मीटर पर एक और छोटा किला आता है जो सैनिकों की आरामगाह था !परकोटे के चारों तरफ़ सीढ़ीदार गुंबद बने हुए है जो अब जीर्ण- शीर्ण अवस्था में है I
इंदौर के पास स्थित कजलीगढ़ ट्रेकिंग का सबसे उपयुक्त स्थल है I ये किला सरकारी देखरेख के अभाव में दिन-प्रतिदिन बदहाल होता जा रहा है !
इन सब उपेक्षाओ को नज़र अंदाज़ करके पर्यटक किले की बनावट और शांत माहौल मे सब कुछ भुल जाता है I इस किले के ठीक पास एक प्राचीन शिव मंदिर भी है यहाँ बहता झरना होली तक गिरता रहता है नीचे कुण्ड में तैराकी का अपना ही मजा है I कभी इंदौर के राजा - महाराजाओं की मनपसंद जगह रहा ये स्थल आज भी उतना ही रोमाँचक और रहस्यमयीं है जितना सालों पहले हुआ करता था I सुहावने मौसम में बादलों का झुरमुट इस किले के ऊपर ही मँडराता रहता है I बारिश में यहाँ घूमने का अपना ही मजा है तो गर्मी के मौसम में यहाँ की शाम "शबे मालवा" को चरितार्थ करती है I फोटोग्राफी के लिये ये स्थल मांडव से कम नहीं है अगर इंदौर और उसके आसपास के पर्यटक माण्डव जैसी लोकेशन इंदौर के पास मे ढूंढना चाहते है तो उनके लिये कजलीगढ़ बहुत उपयुक्त ऑप्शन है I जय हो ……… जावेद शाह खजराना ,इंदौर
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