Monday, 25 May 2015

kajligarh

रहस्य और रोमांच से भरपूर कजलीगढ़ का किला *** जावेद शाह खजराना  {लेखक }

इंदौर से खंडवा जाते हुए 20 किलोमीटर के रास्ते में सिमरोल नामक गाँव आता है I यह बहुत पुराना गाँव है I इसी गांव की मिट्‍टी में चरित्र अभिनेता सी0 एच0 दुबे का जन्म हुआ I मेहबूब खान ने भी पहली कलर फ़िल्म ' आन' की बहुत -सी शूटिंग की I गाँव की आब -ओ- हवा में आज भी हिन्दु - मुस्लिम एकता की खुशबु बहतीं है I

जावेद शाह खजराना 

javed shah khajrana
यहाँ से करीब 6 किलोमीटर दूर पूर्व की दिशा मे इंदौर के महाराजा शिवाजी राव होल्कर द्वारा बनवायी गई शिकारगाह है I रहस्य और रोमांच से भरपूर ये जगह कजलीगढ़ के नाम से मशहूर है I
 यहाँ तक पहुँचने के लिये किसी भी वाहन से जाया जा सकता है I सिमरोल से कजलीगढ़ की तरफ़ मुड़ते ही आसपास फ़ैले हरे-भरे खेत और खलियान मन मोह लेते है I सीधे हाथ की तरफ़ एक दरगाह भी है जहाँ हर साल उर्स भी होता है I सिमरोल से लेकर कजलीगढ़ तक लगभग सारा रास्ता पक्का और खूबसुरत बना हुआ है , रास्ते में फैली हरियाली के बीच पता ही नहीं चलता की कब कजलीगढ़ आ गया I जैसे ही हम कजलीगढ़ के इलाके के प्रवेश करते है दुर - दूर तक फैले मैदान नजर आते है I इन मैदानों के सबसे आख़िर छोर पर दोनों और खाइयों से घिरा कजलीगढ़ का किला नजर आता है I ये किला आज भी अपनी आन - बान - शान से सीना ताने खड़ा है I 
गाहे - बगाहे कोई भुला भटका पर्यटक यहाँ आ जाता है I 
 इस किले मे घुसते ही किले के विशाल दरवाजे के ठीक पास साधुु-संतों ने अपना डेरा जमाया हुआ है I कजलीगढ़ रहस्य और रोमांच से भरपूर स्थल है I 

Kajligarh 

कजलीगढ़ फोर्ट __ kajligarh

कजलीगढ़ रहस्य और रोमांच से भरपूर I  इस किलेनुमा परकोटे में दाखिल होते है दूर तलक फैले सन्नाटे को चीरते हुए सन-सन हवाये चलती है I सन्नाटे मे पत्तो के खड़कने तक की आवाज़ सुन सकते है I कुछ मीटर पर एक और छोटा किला आता है जो सैनिकों की आरामगाह था !परकोटे के चारों तरफ़ सीढ़ीदार गुंबद बने हुए है जो अब जीर्ण- शीर्ण अवस्था में है I 

इंदौर के पास स्थित कजलीगढ़ ट्रेकिंग का सबसे उपयुक्त स्थल है I ये किला सरकारी देखरेख के अभाव में दिन-प्रतिदिन बदहाल होता जा रहा है ! 
 इन सब उपेक्षाओ को नज़र अंदाज़ करके पर्यटक किले की बनावट और शांत माहौल मे सब कुछ भुल जाता है I
 इस किले के ठीक पास एक प्राचीन शिव मंदिर भी है यहाँ बहता झरना होली तक गिरता रहता है नीचे कुण्ड में तैराकी का अपना ही मजा है  I
कभी इंदौर के राजा - महाराजाओं की मनपसंद जगह रहा ये स्थल आज भी उतना ही रोमाँचक और रहस्यमयीं है जितना सालों पहले हुआ करता था I सुहावने मौसम में बादलों का झुरमुट इस किले के ऊपर ही मँडराता रहता है I बारिश में यहाँ घूमने का अपना ही मजा है तो गर्मी के मौसम में यहाँ की शाम "शबे मालवा" को चरितार्थ करती है I  फोटोग्राफी के लिये ये स्थल मांडव से कम नहीं है अगर इंदौर और उसके आसपास के पर्यटक माण्डव जैसी लोकेशन इंदौर के पास मे ढूंढना चाहते है तो उनके लिये कजलीगढ़ बहुत उपयुक्त ऑप्शन है I
    जय हो ……… जावेद शाह खजराना ,इंदौर